पारदर्शिता के मोर्चे पर विफल मोहल्ला क्लीनिक, डाटा बैंक तैयार करने की योजना फ्लॉप

नई दिल्ली । दिल्ली सरकार की मोहल्ला क्लीनिक योजना पारदर्शिता के मोर्चे पर भी विफल साबित रही। मोहल्ला क्लीनिक में इलाज के लिए आने वाले मरीजों का डाटा बैंक तैयार करने का सरकार ने दावा किया था। कुछ क्लीनिक में डाक्टरों को टैब भी दिए गए।

मरीजों के बारे में पूरी जानकारी तथा उनकी बीमारी व कौन-कौन सी दवाईयां दी जा रही है इसकी डिटेल स्टोर करने के निर्देश दिए गए थे। मकसद यह कि अगर आप एक बार अपनी किसी बीमारी के लिए किसी मोहल्ला क्लीनिक, पॉली क्लीनिक या फिर अस्पताल में इलाज के लिए जाएंगे तो कोई पेपर व जांच रिपोर्ट ले जाने की जरूरत नहीं होगी। बस एक क्लिक में डॉक्टर को सारी जानकारी मिल जाएगी।

योजना पूरी तरह फ्लॉप साबित

यह योजना पूरी तरह फ्लॉप साबित हो गई। क्लीनिक में जो मरीज आते हैं उनकी डिटेल रजिस्टर में लिखी जा रही है। आरोप भी लग रहे हैं कि मरीजों के नाम पर घोटाला हो रहा है। जहां कम मरीज आते हैं वहां भी रजिस्टर में अधिक मरीजों का नाम जोड़कर उसके हिसाब से बिल थमाया जा रहा है।

लिए टेंडर प्रक्रिया जारी करने की कोशिश

दिल्ली सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक में पहली बार आने वाले प्रत्येक मरीज को एक यूनिक आइडी देने का ऐलान किया था। जैसे ही कोई भी डॉक्टर मरीज को जारी किया गया नंबर व कोड डालेगा तो उसकी तमाम जानकारियां स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाएंगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मौजूदा स्थिति यह है कि स्वास्थ्य विभाग इसके लिए टेंडर प्रक्रिया जारी करने की कोशिश में है।

धोखेबाजों ने स्वास्थ्य सेवाओं में ईमानदारी नहीं दिखाई

मालूम हो कि सरकार ने जब मरीजों का डाटा बैंक तैयार करने का ऐलान किया था, तब सभी ने इसकी तारीफ की थी। केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन कहा था कि मोहल्ला क्लीनिक एक ऐसी पहल थी, जिस पर दिल्ली नाज कर सकती थी, लेकिन अफसोस इन लालची धोखेबाजों ने स्वास्थ्य सेवाओं में भी ईमानदारी नहीं दिखाई। उन्होंने बकायदा ट्वीट कर यह प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने भी यह आरोप लगाया था कि ‘आप’ सरकार द्वारा चलाए जा रहे मोहल्ला क्लीनिक में डॉक्टर मरीजों की झूठी एंट्री करते हैं, उनके दोबारा आने और अपनी आय के लिए उन्हें बेकार की दवाएं देते हैं।

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