दून की मलिन बस्तियों में 45 फीसद हाउस टैक्स माफ

देहरादून : मलिन बस्तीवासियों को राज्य स्थापना दिवस का तोहफा देते हुए नगर निगम ने उन्हें हाउस टैक्स में तकरीबन 45 फीसद की छूट देने का फैसला किया है। लंबी-चौड़ी कसरत के बाद निगम 19 साल बाद इसी माह से बस्तियों से हाउस टैक्स वसूलने की तैयारी कर रहा। इसके दायरे में मलिन बस्तियों के करीब 40 हजार घर आएंगे।

महापौर विनोद चमोली ने बताया कि बस्तियों पर सेल्फ असेसमेंट में पहले 25 फीसद की छूट दी जाएगी। इसके बाद शेष टैक्स पर 20 फीसद की अतिरिक्त छूट दी जाएगी। उस क्षेत्र का जो टैक्स तय है, उसमें बस्तीवासियों को सामान्य रूप से करीब 45 फीसद छूट का लाभ होगा।

नगर निगम के टैक्स अनुभाग ने नवंबर से टैक्स वसूली की कार्ययोजना बना ली है। इसके लिए बस्तियों में टैक्स के फार्म बांटे गए हैं और कोशिश है कि आने वाले चार-पांच दिन में किसी एक बस्ती से टैक्स वसूलने की शुरुआत कर दी जाए।

उन्होंने कहा कि बस्तियों से वित्तीय वर्ष 2014-15 में लागू सेल्फ असेसमेंट प्रणाली के आधार पर ही टैक्स वसूला जाएगा। चमोली ने बताया कि मलिन बस्तियों पर लगाए जाने वाले हाउस टैक्स में छोटे भवनों को रियायत भी दी गई है। जिन भवनों के टैक्स का आकलन 360 रुपये से कम आ रहे है, उनसे हाउस टैक्स वसूल नहीं किया जाएगा।

इसके साथ ही क्षेत्रीय निरीक्षकों को दायित्व दे दिया गया है कि वह सूची तैयार कर स्वकर (सेल्फ असेसमेंट) के फार्म वितरित कर दें। फार्म के सत्यापन की जिम्मेदारी भी निरीक्षकों पर डाली गई है।

हाउस टैक्स के लिए यह दस्तावेज जरूरी

मलिन बस्तियों में जिन भवनों पर पूर्व में टैक्स नहीं था, उनको टैक्स के दायरे में लाने के लिए भवन निर्माण करने वाले व्यक्ति/स्वामी बिजली -पानी के बिल, आधार कार्ड, राशन कार्ड, गैस कनेक्शन आदि के दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं। जबकि पूर्व में टैक्स के दायरे में रहे भवनों पर सेल्फ असेसमेंट के आधार पर टैक्स वसूलने की कार्रवाई होगी।

दो करोड़ रुपये तक मिलेगा राजस्व

महापौर विनोद चमोली ने बताया कि मलिन बस्तियों को हाउस टैक्स में दायरे में लाने के बाद डेढ़ से दो करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त हो सकेगा।

निगम बनने पर बंद हुआ था टैक्स

पूर्व में जब निगम नगर पालिका था तो उस समय वर्ष 1992 में मलिन बस्तियों पर हाउस टैक्स लगाया गया था। विनोद चमोली उस समय हाउस टैक्स असेसमेंट कमेटी के अध्यक्ष थे। तब मलिन बस्तियों में घरों की संख्या 20 हजार के करीब थी।

वर्ष 1998 में पलिका से नगर निगम बना तो यह कार्रवाई बंद पड़ गई। इसका कारण था कि पालिका में रेंटल वैल्यू के आधार पर टैक्स वसूला जाता था जबकि निगम बनने पर कारपेट एरिया का नियम लागू हो गया। इसके चलते मलिन बस्तियों समेत अन्य क्षेत्रों में भी कर में संशोधन नहीं हो पाया। जबकि पांच साल के अंतराल में संशोधन आवश्यक होता है। वर्ष 2013 में चमोली ने हाउस टैक्स में संशोधन किया, मगर मलिन बस्तियों का हाउस स्थगित ही रहा। जिसे अब लागू किया जा रहा।

News Source: jagran.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *