होलाष्टक में आठ दिन तक नहीं होंगे शुभ कार्य, राशि के मुताबिक अर्पित करें लकड़ी

देहरादून : होलाष्टक के शुरू होते ही अब आठ दिनों तक शुभ कार्य नहीं हो सकेंगे। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक होलाष्टक माना गया है। इस आठ दिन की अवधि में कोई भी मांगलिक कार्य शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए इस अवधि में विवाह, मूहूर्त समेत कोई भी कार्य नहीं किए जाते हैं।

होलाष्टक शुरू होते ही होलिका दहन की विधिवत पूजा की तैयारी शुरू हो गई है। इस पूजा में भी सभी राशियों को मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

 होलाष्टक पूजा की अवधि

होलाष्टक के प्रथम दिन होलिका दहन वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। उसमें सूखे उपले, लकड़ी, सूखी घास, होली का डंडा स्थापित किया जाता है। यदि किसी सार्वजनिक चौराहे पर पूजा की गई हो तो उस क्षेत्र में आठ दिनों तक कोई शुभ कार्य भी नहीं किए जाते हैं।

राशि के अनुसार अर्पित करें लकड़ी 

मेष: वृश्चिक-खैर या खदिर

वृष,तुला-गूलर

मिथुन,कन्या-उपामार्ग

धनु, मीन-पीपल

मकर,कुंभ-शमी

कर्क, पलाश

सिंह:मदार

होलाष्टक का पौराणिक इतिहास

ज्योतिषी बंशीधर नौटियाल के अनुसार, इसके पीछे मान्यता है कि कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास किया था। इस पर शिव ने कामदेव को फाल्गुन की अष्टमी पर भस्म कर दिया था। क्योंकि कामदेव को प्रेम का देवता माना जाता है, इसलिए उनके भस्म होने से शोक की लहर फैल गई। जिसके कारण इस आठ दिन की अवधि में कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। बताया कि इस होलाष्टक में एक तिथि कम है।

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