क्यो पहने है डॉ त्रिलोक चंद्र सोनी हरे कपड़ो को

देहरादून: जीवन अनमोल हैं और इस जहां में लोगो ने जीने के अपने अलग अलग तरीके निकाले है किसी को नए नए पहनावे का शौक हैं ताकि में कितना अच्छा दिख सकू और किसी को पहनावें का ऐसा शौक है जो दूसरों को अपने पहनावें से कुछ संदेश दें सके। नौकरी पेशा और पैसा अपने जीने के लिए सभी कमाते है कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो दुसरो की खुशियों में खुशया देना चाहते हैं। दुसरो का भविष्य कैसे सुरक्षित रहे उसके लिए कार्य करने लग जाते है।  जी हाँ हम बात कर रहे हैं डॉ त्रिलोक चंद्र सोनी की। जो पेशे से शिक्षक हैं और वर्तमान में राजकीय इण्टर कॉलेज मरोड़ा(सकलाना) टिहरी में प्रवक्ता भूगोल के पद पर कार्यरत हैं जब हमनें डॉ सोनी से पूछा कि आप अच्छे पदपर कार्यरत हैं फिर भी ये हरे कपड़े क्यों पहनते हो। डॉ सोनी कहते हैं मैं भी इंसान हूं मुझे भी इन वस्त्रों को पहने में स्वाभाविक है हिचकिचाहट होती होगी कि लोग मुझे क्या कहेंगे, मैं कैसा लगूंगा, लोग किस नजीरिया से देखेंगे, लोग हसेंगे, लेकिन इस प्रकृति में कुछ शक्तियां ऐसे भी हैं जो इंसान तो क्या दुनियां को बदल सकती हैं उसी शक्ति ने मेरे भीतर के भावनाओं को बदलकर मुझे इतनी सहनशीलता शक्ति दी मैं हरे वस्त्रों को पहनू क्योंकि इस प्रकृति को पता था बीस बाइस सालों में कोई बहुत बडी आपदा आएगी लोग ऑक्सीजन के लिए तरसेंगे अगर धरती के गोद में रहकर आप जन जन को जागरूक करिए वो जिम्मा उसने मुझे दिया तभी तो मेरे से इस प्रकृति ने ये हरे वस्त्र धारण कराएं हैं तब लोगो ने कहा होगा ये पागल है अब समझ मे आता होगा जगह जगह 22 सालों से ये पागल हरे कपड़े पहन कर क्यो घुमा करता था अगर इस प्रकृति ने मुझे इन वस्त्रों को पहनने के लिए प्रेरित नही किया होता तो हरे कपड़ो को पहनकर अभियान चलाना जरूरी था मुझे तो पता भी नही कि मेरे दिल दिमांग में ये विचार कैसे आया जो मैंने ये हरे कपड़े पहने लेकिन प्रकृति को यही मंजूर था मुझे उसने ये कपड़े पहनाये आज में कही भी जाता हूं रिस्तेदारी, शादी, कौथिको, मेलो, गांव व शहरों, बैठकों, कार्यक्रमों, किसी भी अधिकारी, मंत्री, विधायकों, मुख्यमंत्री व राज्यपाल तथा केंद्रीय मंत्रियों या आम जनमानस से मिलने तो बड़ी तसल्ली से जैसे कोटपैन्ट पहन रहा हूंगा वैसे अपने हरे कपड़ो को पहनता हूं। इस पृथ्वी में प्रकृति ने मानव जीवन देकर मुझे हरे वस्त्र पहनाकर प्राणी जीवन की सेवा करने का मौका दिया हैं में तनमन से उसे निभाउंगा क्योंकि ये में नही कर रहा हू इसे मुझसे यहीं प्रकृति नए नए विचारों को मेरे दिल दिमांग में डालकर प्रेरित करती हैं जैसे पौधे उपहार में भेंट करना, जन्मदिन पर पौधों को लगाना, मेरा पेड़-मेरा दोस्त, मेरा वृक्ष-मेरा मित्र, पहाड़ो में हो रहे वाहन दुर्घटनाओं को रोकने, उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना, उत्तराखंड के जंगलों को आर्थिकी, आमदनी और रोजगार के स्रोत बनाने, उत्तराखंड को फ़लपट्टी के रूप में विकसित करने, हमारे जंगली फलों (हिंसर, किनगोड़, घिंघारों व अन्य) का बाजार दिलाना, मनरेगा से अपने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने, पानी के जलस्रोतों को बचाना, वनाग्नि रोकना और कई अन्य हैं जिन्हें मुझे इस धरातल पर उतारने की परम् शक्ति प्रकृति देती हैं और उसे में प्रकृति देवता का आदेश समझ कर करता हूँ उसका में अनुपालन करता हूं मैं अपनी इच्छा से कुछ नही करता हूं मेरा दिशा निर्देश इस प्रकृति द्वारा किए जाते हैं मैंतो एक साधारण मानव हूं पूरी सृष्टि इस प्रकृति में निहित है इसलिए में इसकी पूजा करता हूं और इसी को अपना देवता (प्रकृति देवता) मानता हूं इस धरा में मानव जीवन होने के नाते मेरा प्रयास है एक सुंदर हरित वातावरण हो जहाँ पेड़ पौधे, जीव जंतु, पशु पक्षिया, मानव अमन चैन व भाईचारे, समाज मे प्रेम बंधुत्व और एक खुशहाल जीवन हो जहां कोई किसी को दुःख दिए खुशियों से रहे यही इन हरे कपड़ो का राज हैं इन्ही हरे कपड़ो के वजह मुझे वृक्षमित्र के नाम से भी जाना जाता हैं प्रकृति हमारी धरोहर हैं लेकिन ये ध्यान रहे हम प्रकृति के है इसकी हिफाज़त की जिम्मेदारी सबकी हो।

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