मैक्स अस्पताल ने जीवित नवजात को बताया मृत, और फिर हुई हलचल

नई दिल्ली । गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में 18 लाख के बिल के बावजूद मासूम आद्या की मौत का मामला थमा भी नहीं था कि दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल में एक ऐसा ही मामला सामने आया है।

अस्पताल ने जुड़वां नवजातों को मृत बताकर पैकेट में पैक कर परिजनों को सौंप दिया। इसमें से एक नवजात बाद में जीवित निकला। जीवित को दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टर उसकी गहन निगरानी कर रहे हैं।

इधर, मैक्स अस्पताल के लचर रवैये से नाराज परिजनों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन किया व आरोप लगाया कि पूरे समय डॉक्टर केवल खर्च की राशि बताते रहे। पुलिस ने लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अस्पताल प्रशासन ने भी जांच पूरी होने तक आरोपी डॉक्टर को अवकाश पर भेज दिया है।

अमनविहार के प्रताप विहार निवासी प्रवीण कुमार ने बताया कि उनकी बेटी वर्षा (21) करीब 22 हफ्ते की गर्भवती थी। 27 नवंबर की रात पेट में दर्द होने पर उसे पश्चिम विहार के अट्टम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

लेकिन अगले दिन हालत बिगड़ने पर उसे शालीमार बाग के मैक्स अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया व 28 नवंबर को दोपहर 12 बजे उसे मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने वर्षा को रक्त स्त्राव होने की जानकारी देते हुए एक इंजेक्श्न लगाने की बात कही।

यह इंजेक्शन बाहर से मंगाकर लगाया गया, जिसके लिए अस्पताल ने 35 हजार रुपये वसूले। इस इंजेक्शन के लगाने के बाद उसी रात आठ बजे वर्षा की हालत में सुधार बताया, लेकिन 29 नवंबर को फिर रक्त स्त्राव होने की जानकारी दी गई और कहा कि प्रसव कराना होगा।

बकौल प्रवीण 30 नवंबर की सुबह 7:30 बजे उनकी बेटी ने एक बेटे को जन्म दिया व 7:42 एक बेटी भी जन्मी। जिसे डाक्टर ने मृत बता दिया था।

एनआइसीयू के लिए मांगे 50 लाख

परिजनों ने कहा कि अस्पताल की ओर से कहा गया कि जीवित बच्चा 22 हफ्ते का है और समय पूर्व डिलीवरी होने के कारण उसे एनआइसीयू में रखना होगा। इसके लिए तीन माह एनआइसीयू में रखने पर 50 लाख का खर्च बताया। भारी भरकम खर्च पर परिजनों ने असमर्थता जता दी। दिन में 1:30 बजे डॉक्टरों ने बताया कि वर्षा के बेटे की भी मौत हो गई है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने दोनों बच्चों को मृत घोषित करते हुए पैकेट में बंद कर परिजनों को सौंप दिया।

रास्ते में पैकेट में हुई हलचल : बच्चे के नाना प्रवीण व पिता आशीष दोनों को ऑटो से लेकर अंतिम संस्कार के लिए जा रहे थे। रास्ते में एक पैकेट के अंदर बच्चे के पैर के हिलते हुए महसूस हुए तो प्रवीण ने तुरंत पैकट खोला। वह यह देखकर दंग रह गए कि वर्षा का बेटा जीवित था।

परिजन जीवित नवजात को लेकर तुरंत पास के पीतमपुरा स्थित अग्रवाल नर्सिंग होम में ले गए। डाक्टरों के अनुसार बच्चे का वजन करीब 650 ग्राम है। उसकी हालत गंभीर है।

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