घंटों तक जाम लगने से चारधाम यात्री व स्थानीय लोग हो रहे परेशान
रुद्रप्रयाग, । रुद्रप्रयाग व चमोली की जनता के साथ ही चारधाम यात्रा के लिये सिरोबगड़ डेंजर जोन लगातार परेशानी का सवब बना हुआ है। बारिश होते ही आये दिन सिरोबगड़ की पहाड़ी से मलबा एवं बोल्डर गिर रहे हैं, जिस कारण घंटों तक जाम लगने से आम जनता व यात्री परेशान हो रहे हैं। सिरोबगड़ का स्थाई ट्रीटमेंट न होने से प्रत्येक मानसूनी सीजन में चारधाम यात्रियों के साथ ही स्थानीय जनता को अनेक परेशानियों से होकर गुजरना पड़ रहा है। सिरोबगड़ के वैकल्पिक छांतीखाल-डुंगरीपंथ मोटरमार्ग की भी बदहाल स्थिति है। जबकि कलियासौड़-पपड़ासू बायपाय का निर्माण कार्य पिछले कई वर्षों से अधर में लटका हुआ है।
ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रुद्रप्रयाग व पौड़ी जिले की सीमा में स्थित सिरोबगड़ डेंजर जोन पिछले कई दशकों से नासूर बना हुआ है। प्रत्येक वर्ष मानसूनी सीजन के दौरान यहां पर पहाड़ी से मलबा व बोल्डर गिरने के साथ ही घंटों तक जाम लगना आम बात है। इस वर्ष भी मानसूर सीजन की शुरूआत से लेकर अभी तक सिरोबगड़ डेंजर जोन लगातार सक्रिय है। बारिश होती ही सिरोबगड़ की पहाड़ी से लगातार बोल्डर गिर रहे हैं और घंटों तक यातायात बाधित हो रहा है। कभी-कभार तो सिरोबगड़ को खुलने में दिनभर का भी समय लग जा रहा है। बद्रीनाथ हाईवे पर सिरोबगड़ से लेकर नरकोटा तक मौत बरस रही है। लगभग पांच किमी के दायरे में कई भूस्खलन क्षेत्र बन गये हैं, जो कि लगातार सक्रिय हैं।
सिरोबगड़ डेंजर जोन के विकल्प के रूप में कलियासौड़-पपड़ासू बायपास का निर्माण भी विगत कई वर्ष पूर्व शुरू हुआ था, लेकिन यह निर्माण कार्य भी आधा-अधूरा छूटा हुआ है। यहां भी फिलहाल कार्य होने की कोई संभावना नहीं है। जनता को उम्मीद थी कि बायपास का निर्माण होने से सिरोबगड़ की समस्या से निजात मिलेगी, लेकिन कई वर्ष गुजर जाने के बाद भी ऐसा नहीं हो पाया है। जिस कारण प्रत्येक वर्ष मानसून सीजन के दो से तीन महीनों तक चारधाम यात्रियों के साथ ही चमोली व रुद्रप्रयाग की जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभार तो रात भी लोगों को हाईवे पर ही गुजारनी पड़ती है। खांखरा के पूर्व प्रधान नरेन्द्र ममगाईं, प्रदीप मलासी सहित अन्य लोगों का कहना है कि सिरोबगड़ की परेशानी पिछले कई दशकों की है। मानसून सीजन में सिरोबगड़ को पार करते समय मौत से सामना होने का भय सताता रहता है। चारधाम यात्रा के साथ ही स्थानीय लोगों के हितों को देखते हुये सिरोबगड़ का स्थाई समाधान आवश्यक है।

