उत्‍तराखंड: 25 लोगों ने घोषित किया 12 करोड़ कालाधन

देहरादून, [सुमन सेमवाल]: नोटबंदी के दौरान बैंक खातों में करोड़ों रुपये की अघोषित रकम जमा कराने वालों पर आयकर विभाग की सख्ती के बाद भी भय नजर नहीं आ रहा। खातों में एक करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराने वाले जिन 200 से अधिक लोगों को आयकर विभाग ने नोटिस जारी किए, उनमें से अभी तक महज 12.5 फीसद लोगों ने ही काली कमाई घोषित करने की दिशा में हामी भरी है। यह राशि 12 करोड़ के लगभग है।
मुख्य आयकर आयुक्त अभय तायल के मुताबिक 31 मार्च तक प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) में 49.9 फीसद राशि जमा कराकर किसी भी अन्य तरह की कार्रवाई से बचा जा सकता है। नोटबंदी के दौरान खातों में अघोषित आय के रूप में बड़ी रकम भेजने वाले लोगों को इसी आशय के नोटिस भेजे गए हैं। पीएमजीकेवाई में चार लोगों ने करीब तीन करोड़ रुपये की आय स्वैच्छिक रूप से घोषित की है, जबकि 21 लोगों ने अपनी नौ करोड़ रुपये की अघोषित आय सरेंडर करने में हामी भरी है।
आयकर अधिकारियों के मुताबिक यह संख्या अभी काफी कम है। इसके पीछे बड़ी वजह उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव भी रहा। इसके चलते काफी विलंब से नौ मार्च से ही सर्वे, नोटिस आदि की कार्रवाई शुरू की जा सकी। पीएमजीकेवाई में आय घोषित करने के लिए अभी भी कुछ दिन शेष हैं। विभाग का कहना है कि जिसके भी पास कालाधन है, वह इसे घोषित कर दें, क्योंकि इसके बाद अधिक कर व जुर्माने के साथ मुकदमा दर्ज करने की भी कार्रवाई की जाएगी।
विंग का हिस्सा पांच करोड़
आयकर विभाग के समक्ष जिन 25 लोगों ने करीब 12 करोड़ रुपये की अघोषित आय सरेंडर करने को हामी भरी है, उसमें लगभग पांच करोड़ रुपये की राशि इन्वेस्टिगेशन विंग के माध्यम से सरेंडर कराई जा रही है। इसमें 1.10 करोड़ रुपये सरेंडर भी कराए जा चुके हैं।
आयकर विभाग के पास स्पष्ट खाका
नोटबंदी में खातों में बड़ी रकम जमा कराने पर इन दिनों की जा रही सर्वे की कार्रवाई सिर्फ अंधेरे में तीर मारना नहीं।  बल्कि, आयकर विभाग के पास खाते में जमा राशि और संबंधित व्यक्ति की आय, रिटर्न की गई फाइल का पूरा लेखा-जोखा है। ऐसे में जो भी लोग अभी अपनी अघोषित आय घोषित नहीं कर रहे हैं, उन्हें बाद में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

 

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