देहरादून में उपलब्ध है बेहतरीन और भरोसेमंद क्षारसूत्र चिकित्सा : डाॅ. ललित चौधरी
संदीप शर्मा की कलम से विशेष रिपोर्ट / अब देहरादून में बवासीर, फिस्टुला, भगन्दर आदि जटिल रोगों का सफल आयुर्वेदिक इलाज किया जा रहा है डाॅ. ललित चौधरी के द्वारा। आज की भागमभाग जिन्दगी में अनियन्त्रित खान-पान के चलते ऐसे ऐसे रोग पैदा हो रहे है जिनका इलाज आधुनिक विज्ञान में भी मुश्किल हो रहा है, या फिर इतना मंहगा है कि आम आदमी की पहुंच से दूर होता जा रहा है। बवासीर, फिस्टुला और भगन्दर जैसी बीमारियों ने आम आदमी को बहुत परेशान कर रखा है। ऐसे में पंजाब से आए एक सफल चिकित्सक आयुर्वेदाचार्य, रसाचार्य डाॅ. ललित चैधरी उम्मीद की एक किरण बनकर सामने आए हैं। बवासीर, फिस्टुला और भगन्दर जैसी मुश्किल बीमारियों का क्षारसूत्र के द्वारा इलाज करके डाॅ. ललित चैधरी देहरादून वासियों के लिए आशा की नई किरण लेकर आए हैं।
डाॅ. ललित चौधरी का चिकित्सालय विवेक विहार, पाॅकेट-3 बल्लीवाला चैक, कांवली रोड़, देहरादून में स्थापित है। जहां पर आयुर्वेद और केरलीय पंचकर्मा द्वारा माइग्रेन, स्पाॅडिलाईसिस, शुगर, अस्थमा, स्लिप डिस्क, त्वचा रोग,मस्तिष्क व नसो की बीमारियों, पेट लीवर के कराग, संतानहीनता, मोटापा, किडनी रोग, हडडी व जोड़ों के दर्द, कैंसर, बवासीर, भगन्दर फिशर, की क्षारसूत्र द्वारा सफल चिकित्सा की जा रही है। अब तक सैकड़ों लोगो को अनेकों मुश्किल बीमारियों से आजादी दिला चुके हैं। 11 महीने का सात्विक, 6 महीने का अनुराग, 7 महीने का हर्षित यह एक वर्ष से भी कम के बच्चे जो फिस्टुला से पीड़ित थे, डाॅ. ललित चैधरी ने इन सबको क्षारसूत्र चिकित्सा के द्वारा पूरी तरह रोग मुक्त कर दिया। वर्तमान में सैकड़ों लोग डाॅ. ललित चैधरी के चिकित्सालय में इलाज करा रहे हैं। डाॅ. ललित चैधरी ने देहरादून के कई नेताओं और नौकरशाहोें का भी सफल इलाज किया है। मंहगी और मुश्किल होती चिकित्सा व्यवस्था में डाॅ. ललित चैधरी का चिकित्सालय देहरादून और आस-पास के शहरों-गांवों के लिए आकर्षण और उम्मीद का केन्द्र बनकर उभरा है।
क्या है क्षारसूत्र चिकित्सा –
क्षार सूत्र एक आयुर्वेदिक पैरासर्जिकल तकनीक है। गुदा-मलाशय संबंधी समस्याओं जैसे कि फिस्टुला, फिशर और बवासीर के इलाज में इसका प्रयोग होता है। इस चिकित्सा में हर्बल अर्क और क्षारीय पदार्थों से लेपित एक औषधीय धागा (क्षार सूत्र) शामिल होता है जो धीरे-धीरे प्रभावित बैक्टीरिया को काटकर ठीक करता है। इस पद्धति को पारंपरिक सर्जरी का एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है, खासतौर पर मुश्किल फिस्टुला के लिए।
क्षारसूत्र क्या है-
क्षार सूत्र एक विशेष आयुर्वेदिक धागा है, जिसे शल्य चिकित्सा के दौरान उपयोग किए जाने वाले लिनेन धागे पर हर्बल और क्षारीय पदार्थों की बार-बार परत चढ़ाकर तैयार किया जाता है। प्राथमिक सामग्रियों में अक्सर स्नूही (यूफोरबिया नेरीफोलिया) का लेटेक्स, गुग्गुलु (कोमीफोरा मुकुल) की राल, और हरिद्रा (करकुमा लोंगा) पाउडर शामिल होते हैं।
किस प्रकार से काम करता है-
क्षार सूत्र को भगन्दर पथ में या प्रभावित क्षेत्र के आसपास डाला जाता है, जहां यह धीरे-धीरे बैक्टीरिया को काटता है और उपचार करता है। औषधीय धागा उस क्षेत्र को साफ करने, अस्वस्थ बैक्टीरिया को हटाने, तथा मवाद या अन्य स्राव को निकालने में मदद करता है, जिससे मर्ज जेती से ठीक होने लगता है।
क्षारसूत्र किस-किस बीमारी में काम आता है-
क्षार सूत्र का प्रयोग गुदा नलिका और गुदा के आस-पास की त्वचा के बीच बनी सुरंग।
गुदा विदर गुदा की परत में फटना या दरार आने पर इसका प्रयोग किया जाता है।
बवासीर (पाइल्स) गुदा और मलाशय में सूजी हुई नसें या मस्से।
पिलोनिडल साइनस टेलबोन के पास एक सिस्ट या सुरंग जो संक्रमित हो सकती है।
अन्य गुदा-मलाशय संबंधी स्थितियां, जिसमें फोड़े और प्रहरी टैग शामिल हैं।
इसमें ध्यान रखने योग्य बातें-
उपचार प्रक्रिया में कई सप्ताह या महीने लग सकते हैं, तथा धागा प्रतिस्थापन के लिए अनुवर्ती नियुक्तियां भी लेनी पड़ सकती हैं। स्थिति की जटिलता के आधार पर ठीक होने का समय अलग-अलग हो सकता है।
यह एक बहु-चरणीय प्रक्रिया धागा प्रतिस्थापन के लिए नियमितता की आवश्यकता होती है। घाव भरने की प्रक्रिया के दौरान घाव से स्राव होना आम बात है, इसमें चिकित्सक से परामर्श लगातार लेना होता है।

