उत्तराखंड में मानसून का कहर और पंचायत चुनाव

देहरादून, । समाजसेवी अनूप नौटियाल का कहना है कि उत्तराखंड में इस समय भारी बारिश हो रही है। जून में सामान्य से 36 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि जून के अंतिम सप्ताह में यह आंकड़ा 96 प्रतिशत अधिक रहा। जुलाई, जो वर्ष का सबसे अधिक बरसात वाला महीना होता है, भूस्खलन, बाढ़ और सड़क अवरोध जैसी घटनाओं के गंभीर जोखिम लेकर आता है। 1 से 28 जून के बीच आपदा और रोड एक्सीडेंट से जुड़ी घटनाओं में इस वर्ष 65 लोगों की मौत हुई, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 103 प्रतिशत अधिक है।
इसके बावजूद, पंचायत चुनाव 24 और 28 जुलाई को कराए जाने निर्धारित हैं तथा मतगणना 31 जुलाई को होगी। इस दौरान लाखों लोगों को चुनावी प्रक्रिया के लिए खतरे मोल लेते हुए अपने घरों से बाहर निकलना होगा और लगभग 80,000 से 1 लाख सरकारी कर्मचारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में ड्यूटी करनी होगी। हमने उच्च न्यायालय में कल यानी 4 जुलाई को 32 पन्नों की एक अपील/रिपोर्ट/प्रार्थना पत्र दायर किया है, जिसमें निवेदन किया गया है कि पंचायत चुनावों को सितंबर अंत या अक्टूबर-नवंबर तक स्थगित किया जाए क्योंकि तब तक मानसून की तीव्रता कम हो जाती है।
यह अपील पूरी तरह मानवीय आधार पर है जिसका उद्देश्य चुनाव से ऊपर मानव जीवन की रक्षा करना है। हमें आशा और विश्वास है कि न्यायालय इस विषय पर संवेदनशीलता से विचार करेंगे।

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